1. ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर टेस्ट
45 की उम्र के बाद ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच महत्वपूर्ण है। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज कई बार शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं देते। समय-समय पर जांच कराने से किसी असामान्यता का जल्दी पता लगाया जा सकता है।
2. कोलेस्ट्रॉल टेस्ट
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अलग-अलग स्तर की जानकारी मिलती है। डॉक्टर उम्र और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर इसकी जांच की सलाह दे सकते हैं।
3. मैमोग्राम
स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मैमोग्राम से स्तन में होने वाले कुछ असामान्य बदलावों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद मिल सकती है। 45 वर्ष की उम्र में इसके बारे में डॉक्टर से स्क्रीनिंग शेड्यूल पर चर्चा करना उचित है।
4. सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग
सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पैप टेस्ट और HPV टेस्ट उपयोग किए जाते हैं। किस उम्र में कौन-सा टेस्ट और कितने अंतराल पर कराना है, यह महिला की उम्र, पिछली रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
5. हड्डियों की जांच
मेनोपॉज के आसपास महिलाओं में हड्डियों का घनत्व कम होने का खतरा बढ़ सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD/DEXA) टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इससे हड्डियों की मजबूती का आकलन करने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को समझने में मदद मिलती है।
जांच को लेकर न बरतें लापरवाही
हर महिला के लिए सभी टेस्ट एक ही समय या एक जैसी अवधि में कराना जरूरी नहीं होता। पारिवारिक इतिहास, वजन, जीवनशैली, पहले से मौजूद जोखिम और पिछली रिपोर्ट के आधार पर जांच की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए 45 की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए डॉक्टर से व्यक्तिगत स्क्रीनिंग प्लान बनवाना बेहतर है।

0 comments:
Post a Comment