इस इंजन को ‘अरावली’ नाम दिया गया है। इसकी क्षमता करीब 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर होगी। यह भारत में पहली बार इस श्रेणी के इतने शक्तिशाली हेलीकॉप्टर इंजन के स्वदेशी डिजाइन और विकास का प्रयास है।
IMRH और नौसेना के हेलीकॉप्टर को मिलेगी ताकत
अरावली इंजन का इस्तेमाल भारत के प्रस्तावित 13 टन इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) में किया जाना है। इसका नौसैनिक संस्करण डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) भी इसी इंजन से संचालित होगा। इससे भविष्य में सैन्य अभियानों के लिए भारत को एक स्वदेशी हाई-पावर इंजन का विकल्प मिल सकेगा।
भारत को मिलेगी अहम तकनीक
इस परियोजना का महत्व सिर्फ इंजन बनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय इंजीनियरों को हाई-प्रेशर कंप्रेसर, पावर टर्बाइन, फ्यूल सिस्टम और इंजन गियरबॉक्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर काम करने का अनुभव मिलेगा। इंजन का निर्माण कर्नाटक के तुमकुरु स्थित प्लांट में किए जाने की योजना है। इससे भारत में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और भविष्य के स्वदेशी एयरो-इंजन कार्यक्रमों को भी मजबूती मिल सकती है।
Mi-17 के विकल्प की दिशा में अहम कदम
भारतीय वायुसेना लंबे समय से रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करती रही है। पुराने हेलीकॉप्टरों को धीरे-धीरे बदलने की जरूरत को देखते हुए स्वदेशी IMRH को महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। ऐसे में देश में ही शक्तिशाली इंजन विकसित होना रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
अरावली इंजन के विकास का काम 2032-33 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसे ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण इलाकों में संचालन के लिए भी तैयार किया जाएगा, जिससे लद्दाख और सियाचिन जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेनाओं की परिचालन क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

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