विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने इस संबंध में जानकारी दी। सरकार की योजना इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की है। इससे पात्र लोगों को इलाज के दौरान भुगतान की प्रक्रिया में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
शुरुआत में इनडोर इलाज होगा कैशलेस
प्रस्तावित व्यवस्था के शुरुआती चरण में अस्पताल में भर्ती होकर होने वाले यानी इनडोर इलाज को कैशलेस किया जाएगा। वहीं अस्पताल में डॉक्टर से सामान्य परामर्श और अन्य आउटडोर उपचार के खर्च की मौजूदा प्रतिपूर्ति व्यवस्था जारी रहेगी। आयुष्मान भारत से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की प्रतिपूर्ति की सीमा को लेकर भी विभागीय स्तर पर सुझावों पर चर्चा की गई है।
गंभीर बीमारियों के मरीजों को राहत
बैठक में चिकित्सा बिलों के सत्यापन में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया गया। वर्तमान प्रक्रिया में कई मामलों में सिविल सर्जन कार्यालय से सत्यापन कराना पड़ता है, जिससे भुगतान में समय लग जाता है। खासकर कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने पर जोर दिया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इलाज के समय आर्थिक बोझ और कागजी प्रक्रिया दोनों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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