भारत की दावेदारी को मिला समर्थन
गुटेरेस ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इससे सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार को लेकर भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को अभी वीटो पावर मिल गया है। सुरक्षा परिषद में सुधार और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने के लिए आगे लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया जरूरी होगी।
रूस-चीन भी भारत के साथ?
ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने के समर्थन को दोहराया है। दोनों देश मौजूदा स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो अधिकार है। ऐसे में भारत की दावेदारी के समर्थन को अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स मंच से वैश्विक दक्षिण की भूमिका बढ़ाने की बात कही। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले वर्षों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कितना बड़ा बदलाव होता है और क्या भारत को स्थायी सीट के साथ वीटो का अधिकार मिल पाता है।

0 comments:
Post a Comment