हजारों किलोमीटर तक निगरानी
Voronezh-M को लंबी दूरी की निगरानी और बैलिस्टिक मिसाइलों की शुरुआती चेतावनी के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी रेंज करीब 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक बताई जाती है और यह एक साथ बड़ी संख्या में लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। रडार का इस्तेमाल मिसाइलों, विमानों और अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने में किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है?
अगर भारत में इस तरह की प्रणाली तैनात होती है तो देश की अर्ली वॉर्निंग और हवाई निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है। लंबी दूरी की निगरानी के कारण संभावित मिसाइल या हवाई खतरों का पहले पता लगाने में मदद मिल सकती है।
आपको बता दें का रूस का ये Voronezh रडार परिवार में अलग-अलग बैंड और क्षमताओं वाले संस्करण मौजूद हैं। हालांकि भारत को कौन सा संस्करण मिलेगा और इसकी तैनाती कहां होगी, इसे लेकर अभी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल यह रूस की ओर से दिया गया प्रस्ताव है और इसे लेकर किसी अंतिम खरीद समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर सौदा आगे बढ़ता है तो यह भारत की रणनीतिक निगरानी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

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