उज्ज्वला योजना: एक परिचय
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था। यह योजना स्वच्छ ईंधन की पहुँच बढ़ाने, महिलाओं को रसोई के धुएं से राहत देने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए लाई गई थी। योजना के तहत लाभार्थियों को स्टोव, रेगुलेटर, इंस्टॉलेशन और पहले गैस रिफिल का कोई खर्च नहीं उठाना पड़ता है।
अब तक की उपलब्धियाँ
योजना के पहले चरण में 8 करोड़ कनेक्शन वितरित किए गए थे, जबकि दूसरा चरण अगस्त 2021 में शुरू हुआ। जुलाई 2025 तक योजना के तहत 10.33 करोड़ से अधिक कनेक्शन वितरित किए जा चुके थे। सरकार ने अगस्त 2025 में एक और बड़ा फैसला लेते हुए 14.2 किलो के सिलेंडर पर ₹300 की सब्सिडी तथा प्रति वर्ष 9 रिफिल तक की पात्रता को मंजूरी दी, जिससे योजना की पहुँच और प्रभावशीलता और भी बढ़ गई।
नए चरण की विशेषताएँ
सरकार द्वारा घोषित इस नए चरण में 676 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें से: ₹512.5 करोड़ नए कनेक्शन देने के लिए, ₹160 करोड़ लक्षित सब्सिडी के लिए, ₹3.5 करोड़ प्रशासनिक और प्रबंधन खर्चों के लिए रखे गए हैं। इस विस्तार से खासतौर पर उन गरीब परिवारों को लाभ मिलेगा, जो अब तक योजना से वंचित थे। यह न सिर्फ महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित ईंधन प्रदान करेगा, बल्कि उनके जीवन स्तर में सुधार और समय की बचत में भी सहायक होगा।
सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव
गांवों और पिछड़े इलाकों में अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाती हैं, जिससे वे धुएं से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। उज्ज्वला योजना ने इन समस्याओं को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है।

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