इस नियुक्ति कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सभागार में किया गया, जहां कुलसचिव प्रो. संजय कुमार, महापौर कुमकुम देवी, विधायक प्रणव कुमार और कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय ने संयुक्त रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया के पूरे होने से न केवल नियुक्त परिवारों में हर्ष है, बल्कि यह पूरे विश्वविद्यालय के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है।
दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि
नवनियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए कुलपति ने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी नियुक्त कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि दो वर्षों की होगी। इस दौरान यदि किसी तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता सामने आती है तो सेवा समाप्त करने में देरी नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय एक परिवार की तरह है, और प्रत्येक कॉलेज इस परिवार का अभिन्न अंग है, इसलिए सभी जगहों को समान महत्व दिया जाएगा।
सरकार की रोजगार नीति का सफल उदाहरण
विधायक प्रणय यादव ने इसे राज्य सरकार की रोजगारोन्मुखी नीति का सार्थक परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम कर रही है, और यह नियुक्ति उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। महापौर कुमकुम देवी ने इस नियुक्ति को लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान बताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्थायित्व भी आएगा।
विश्वविद्यालय की प्रगति की ओर एक और कदम
इस मौके पर कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य का विषय है कि एक ही दिन दो बड़ी उपलब्धियां मिलीं एक ओर अनुकंपा पर 19 आश्रितों की नियुक्ति हुई, तो दूसरी ओर नौवागढ़ी में विश्वविद्यालय की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए जनसुनवाई का आयोजन हुआ। ये दोनों घटनाएं विश्वविद्यालय के सतत विकास और विस्तार की दिशा में मील का पत्थर हैं।
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