Su-57 का भारत को ऑफर: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने यह जानकारी दी है कि रूस ने भारत को न केवल Su-57 फाइटर जेट की आपूर्ति की पेशकश की है, बल्कि इसके स्थानीय निर्माण के लिए भी योजना बनाई गई है। यह प्रस्ताव भारत को केवल एक ग्राहक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
सबसे अहम बात यह है कि इस डील में "ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी" (ToT) का वादा भी शामिल है। यानी भारत में ही इन उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट्स का उत्पादन संभव होगा। रूस की मंशा है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक स्थित प्लांट जैसे मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके निर्माण लागत को भी काबू में रखा जाए।
S-400 मिसाइल सिस्टम: अधूरी डिलीवरी पर भी अपडेट
जहां Su-57 भविष्य की तैयारी है, वहीं S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम भारत की मौजूदा वायु रक्षा क्षमता की रीढ़ बनता जा रहा है। भारत ने 2018 में रूस के साथ 5 रेजिमेंट की डील की थी, जिनमें से अब तक तीन की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि दो अभी बाकी हैं।
रूसी अधिकारियों के अनुसार, शेष दो यूनिट्स की आपूर्ति 2026 और 2027 तक पूरी कर दी जाएगी। रूस की संघीय सैन्य-तकनीकी सहयोग सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगायेव ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच S-400 सिस्टम को लेकर नई आपूर्तियों की बातचीत भी चल रही है। इसका मतलब यह हो सकता है कि भारत भविष्य में S-400 की अतिरिक्त यूनिट्स खरीदने की योजना पर विचार कर सकता है।

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