सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
India Semiconductor Mission के अगले चरण में सिर्फ चिप फैब नहीं, बल्कि मशीनरी, मटेरियल, सप्लाई चेन और भारतीय IP पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे न केवल आयात घटेगा, बल्कि भारत ग्लोबल चिप वैल्यू चेन में मजबूत स्थिति हासिल करेगा।
रेयर अर्थ कॉरिडोर
ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में रेयर अर्थ मटेरियल कॉरिडोर विकसित होंगे। यह EV, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
कस्टम ड्यूटी में कटौती
लिथियम बैटरी, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, डिफेंस MRO, सोलर ग्लास जैसे कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। इससे घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।
स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग
नई R&D स्कीम से भारत को स्पोर्ट्स इक्विपमेंट का ग्लोबल सप्लायर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
SEZ और एविएशन मैन्युफैक्चरिंग
SEZ यूनिट्स को घरेलू बाजार में रियायती ड्यूटी पर बिक्री की छूट दी जाएगी। इसके अलावा, सी-प्लेन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रावधान हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर का आधुनिकीकरण
फाइबर आत्मनिर्भरता, हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट सपोर्ट, मेगा टेक्सटाइल पार्क और स्किल ट्रेनिंग के माध्यम से टेक्सटाइल सेक्टर को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। खादी और गांव उद्योगों को ब्रांडिंग और ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की भी योजना है।
केमिकल, कैपिटल गुड्स और भारी उद्योग
तीन नए केमिकल पार्क और हाई-टेक टूल रूम के लिए अलग स्कीम की घोषणा की गई है। कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹10,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए ₹40,000 करोड़
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। मकसद केवल असेंबली नहीं, बल्कि पार्ट्स का निर्माण भारत में ही होना है।
एक्सपोर्ट और टोल मैन्युफैक्चरिंग में टैक्स राहत
बॉन्डेड जोन में मैन्युफैक्चरिंग करने वाले विदेशी सप्लायरों को 5 साल की टैक्स छूट दी जाएगी। एक्सपोर्ट टाइमलाइन बढ़ाई गई है और कुछ इनपुट्स ड्यूटी-फ्री होंगे।
Biopharma SHAKTI – ₹10,000 करोड़ का निवेश
सरकार ने Biopharma SHAKTI योजना शुरू की है। अगले पांच साल में ₹10,000 करोड़ खर्च कर भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य है। योजना के तहत तीन नए NIPER संस्थान, सात पुराने संस्थानों का अपग्रेड, 1,000 से अधिक क्लीनिकल ट्रायल साइट्स और मजबूत दवा नियामक सिस्टम शामिल होंगे।

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