कागजों में नाम की गलतियां बड़ी समस्या
राजस्व मंत्री ने बताया कि बड़ी संख्या में आवेदन जमीन के रिकॉर्ड में नाम या पिता के नाम की त्रुटियों को लेकर हैं। इन छोटी-छोटी गलतियों के कारण लोगों को अपनी ही जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि परिमार्जन की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।
दाखिल-खारिज में आ रही दिक्कतें
सदन में जमीन की खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज को लेकर भी सवाल उठे। विधायक मंजीत कुमार सिंह ने कुछ जिलों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया बाधित होने का मुद्दा रखा। इस पर डिप्टी सीएम ने बताया कि कई मामलों में खाता-खेसरा स्पष्ट नहीं होने के कारण तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं और आवश्यक कानूनी सलाह भी ली जा रही है।
जमीन विवाद कम करना प्राथमिकता
राज्य सरकार का मानना है कि बिहार में जमीन विवाद लंबे समय से सामाजिक तनाव और हिंसा का कारण रहे हैं। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन से जुड़े झगड़ों को जड़ से खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए रिकॉर्ड को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना जरूरी है।
ब्लॉक स्तर पर रजिस्ट्रेशन काउंटर
प्रक्रिया को तेज करने के लिए अब ब्लॉक स्तर पर रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले जा रहे हैं। यहां अधिकारी सीधे आवेदनों की जांच और निपटारा करेंगे। इससे लोगों को जिला मुख्यालय जाने की जरूरत कम होगी और समय की बचत होगी।
योजनाओं का लाभ मिलेगा आसान
सरकार का मानना है कि जब तक जमीन के रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट और अद्यतन नहीं होंगे, तब तक किसानों और जमीन मालिकों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए समय-सीमा तय कर लंबित मामलों के समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है।
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