लंबित सर्वे की समस्या
मंत्री ने कहा कि राज्य की करीब 20 प्रतिशत भूमि का अब तक सर्वे नहीं हुआ है। इसके कारण जमाबंदी और लगान निर्धारण में बाधाएं हैं। कई किसान इस वजह से सरकारी योजनाओं और अनुदानों से वंचित हैं, जबकि जमीन की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि सर्वे कार्य 2012 में शुरू हुआ, 2015 में इसका पुनर्मूल्यांकन हुआ और 2019 में इसमें बदलाव किए गए। अब इसे मिशन मोड में लेते हुए दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जमीन विवाद रोकते हैं विकास
मंत्री ने कहा कि जमीन से जुड़े विवाद केवल प्रशासनिक समस्या नहीं हैं, बल्कि सामाजिक तनाव भी पैदा करते हैं। उन्होंने इसे “जमीन की बीमारी” कहा और बताया कि राज्य सरकार ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ के जरिए विवादों का पारदर्शी और त्वरित समाधान कर रही है। अब तक 8363 शिकायतों में से 2414 मामलों का समाधान किया जा चुका है। इस पहल की दोनों सदनों में सराहना हुई है।
परिमार्जन आवेदन और प्राथमिकता
राजस्व महा-अभियान के दौरान कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें लगभग 40 लाख परिमार्जन (नाम, खाता और खेसरा सुधार) से जुड़े हैं। सरकार इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की योजना बना रही है, ताकि जमीन मालिकों को योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सके।
जनकल्याण संवाद से होगा पूरा समाधान
जटिल भूमि विवादों के समाधान के लिए अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले गए हैं। इसके जरिए लोगों की शिकायतें सीधे सुनवाई के लिए लाई जा रही हैं, जिससे विवादों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित हो रहा है।

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