2026 तक विस्तार का लक्ष्य
बता दें की स्ट्रॉबेरी विकास योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 3,02,400 रुपये की सहायता दी जा रही है, जो कुल लागत का 40 प्रतिशत है। स्ट्रॉबेरी एक अल्पावधि फसल है, जिससे किसानों को कुछ ही महीनों में आय मिलने लगती है। बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।
वहीं ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 2,70,000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। ड्रैगन फ्रूट कम पानी में उगने वाली और बहुवर्षीय फसल है, जो लंबे समय तक स्थायी आमदनी का स्रोत बन सकती है। एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है, जिससे किसानों को नियमित आय का आधार मिलता है।
शुरुआती लागत में राहत
उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की खेती में शुरुआती निवेश अधिक होता है। सरकारी अनुदान से यह बोझ काफी कम हो जाता है। इससे किसान पारंपरिक धान-गेहूं के साथ नई फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। खेती का विविधीकरण जोखिम को भी कम करता है और आय के कई स्रोत तैयार करता है।
स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट की खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए नर्सरी प्रबंधन, जैम और पल्प जैसे उत्पादों का निर्माण तथा मूल्य संवर्धन के जरिए अतिरिक्त आमदनी के रास्ते खुल रहे हैं। इसका लाभ लेने के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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