विधानसभा में उठा मुद्दा, मंत्री ने दी जानकारी
विधानसभा में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुणने बताया कि राजस्व परिषद की ओर से एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिससे जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी। यह जानकारी उस समय दी गई जब सपा के वीरेंद्र यादव और जय प्रकाश अंचल ने गोंड और खरवार समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र जारी करने में देरी का मामला सदन में उठाया। विधायकों ने आरोप लगाया कि कई जिलों में इन समुदायों के लोगों को डीएम कार्यालय और तहसील मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, फिर भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा है।
17 जिलों में एसटी प्रमाण पत्र की सुविधा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के 17 जिलों में गोंड और खरवार जाति के लोगों को एसटी प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था पहले से लागू है।
वर्ष 2002 में 13 जिलों: महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र में यह सुविधा शुरू की गई थी।
वर्ष 2003 में संतकबीरनगर, कुशीनगर, चंदौली और भदोही को भी इसमें शामिल किया गया।
सरकार का कहना है कि जिन परिवारों के सदस्यों के पास पहले से एसटी प्रमाण पत्र है, उनके परिजनों को प्रमाण पत्र जारी करने में सामान्यतः देरी नहीं होती। हालांकि, पहली बार आवेदन करने वाले मामलों में विस्तृत जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे समय अधिक लग सकता है।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
प्रस्तावित सॉफ्टवेयर के जरिए आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव होगी, दस्तावेजों की डिजिटल जांच की सुविधा मिलेगी, लंबित मामलों की निगरानी आसान होगी, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य है कि पात्र लोगों को बिना अनावश्यक बाधाओं के समय पर प्रमाण पत्र मिल सके।
आम लोगों को मिलेगी राहत
जाति प्रमाण पत्र शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज है। प्रक्रिया में देरी से छात्रों, नौकरी अभ्यर्थियों और लाभार्थियों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

0 comments:
Post a Comment