बिहार में सरकारी जमीन और बकाश्त भूमि पर बड़ा फैसला, सभी जान लें!

पटना: बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह भूमि एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधान परिषद में स्पष्ट किया कि राज्यभर में अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

विधान परिषद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। सभी जिलों को अतिक्रमण से जुड़े मामलों की ऑनलाइन निगरानी और कार्रवाई के लिए आवश्यक आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब तक राज्य में 4,000 से अधिक मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। हालांकि, फिलहाल इस विषय पर किसी नए विशेष कानून को लाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

बकाश्त भूमि पर भी बनेगी स्पष्ट नीति

सदन में बकाश्त भूमि से जुड़े प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि इस विषय पर निर्णय लेने के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने इसे संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि बिना पूरी समीक्षा के कोई भी कदम उठाना उचित नहीं होगा।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक बकाश्त भूमि को रैयती भूमि का दर्जा नहीं मिलता, तब तक उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बकाश्त भूमि के संपरिवर्तन की अनुमति फिलहाल लागू नहीं है।

सरकार का संदेश साफ

सरकार का रुख स्पष्ट है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा और भूमि प्रबंधन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ बकाश्त भूमि के मामलों में संतुलित और कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इस फैसले से जहां एक ओर अवैध कब्जों पर अंकुश लगाने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भूमि से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की दिशा में भी तेजी आने की संभावना है।

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