कर्नाटक के वेमागल में इसका निर्माण केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना में फ्रांस की प्रमुख विमान निर्माण कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर्स और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स मिलकर काम करेंगी। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस पहल की शुरुआत कर इसे रणनीतिक सहयोग का नया आयाम दिया है। बताया जा रहा है कि इस योजना में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।
सबसे ऊंची चोटी पर उतरने वाला हेलीकॉप्टर
एच-125 की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है। यह वही हेलीकॉप्टर है जिसने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर उतरकर और वहां से दोबारा उड़ान भरकर इतिहास रचा। सामान्य तौर पर अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने से हेलीकॉप्टरों की क्षमता प्रभावित होती है, लेकिन एच-125 इस चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
हर मौसम में भरोसेमंद
इस हेलीकॉप्टर को इस तरह तैयार किया गया है कि अत्यधिक गर्मी, कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी यह प्रभावी ढंग से काम कर सके। सैन्य जरूरतों के अनुरूप इसके विशेष संस्करण तैयार किए जाएंगे। कम ध्वनि और कम ऊष्मा संकेत जैसी विशेषताएं इसे रणनीतिक अभियानों में बढ़त दिलाती हैं। पायलट के अलावा इसमें पांच से छह जवान बैठ सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इसे हथियारों से भी सुसज्जित किया जा सकता है, जिससे यह परिवहन, निगरानी और सीमित आक्रामक अभियानों में उपयोगी बनता है।
कई देशों की सेनाओं में तैनात
फ्रांस, अमेरिका और ब्राजील सहित अनेक देशों में यह हेलीकॉप्टर पहले से उपयोग में है। वहां इसका प्रयोग सेना के साथ-साथ पुलिस, राहत एवं बचाव कार्यों और चिकित्सकीय आपात स्थितियों में भी किया जाता है। इसकी देखरेख पर अपेक्षाकृत कम खर्च आता है, जिससे लंबे अभियानों में यह किफायती साबित होता है।
भारतीय सेना को मिलेगा ताकत
भारतीय सशस्त्र बलों के पास पहले से ही अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, लेकिन एच-125 के शामिल होने से हल्के और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता और मजबूत होगी। विशेष रूप से पर्वतीय सीमाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में त्वरित तैनाती के लिए यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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