मौजूदा ढांचे में होगा उत्पादन
भारत में पहले से T-90 भीष्म टैंकों का निर्माण हो रहा है। अब प्रस्ताव है कि इसी उत्पादन सुविधा में T-90MS का निर्माण शुरू किया जाए। इससे नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। बचाई गई राशि को रक्षा अनुसंधान, आधुनिकीकरण और अन्य सामरिक परियोजनाओं में लगाया जा सकता है।
दरअसल, 2019 में भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत 464 T-90MS टैंकों के लाइसेंस उत्पादन के लिए लगभग 2.8 अरब डॉलर के समझौते को मंजूरी दी थी। अब इस परियोजना को वास्तविक उत्पादन चरण में ले जाने की तैयारी हो रही है।
सुरक्षा के लिहाज से और मजबूत
T-90MS में गोला-बारूद भंडारण को नए सिरे से डिजाइन किया गया है, जिसमें ब्लोआउट पैनल शामिल हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में विस्फोट का असर सीमित करने में मदद मिलती है और चालक दल की सुरक्षा बढ़ती है। यह टैंक भविष्य में भारतीय सेना के मौजूदा टी-90 भीष्म बेड़े की जगह ले सकता है।
2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ तनाव के बाद टी-90 भीष्म टैंकों को लद्दाख के अग्रिम इलाकों में तैनात किया गया था। ऐसे में T-90MS का आगमन भारत की उत्तरी सीमाओं पर सामरिक संतुलन को और मजबूत कर सकता है। भारत और रूस के बीच यह सहयोग केवल रक्षा सौदा नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी का भी प्रतीक है।

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