यह निर्णय राज्य विधानसभा में राजस्व भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने घोषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिलेखों में जाति के नाम को बदलने या संक्षिप्त करके सिर्फ “भूमिहार” करने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिया गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
भूमिहार समाज के एक हिस्से ने हाल ही में चिंता व्यक्त की थी कि जाति गणना में केवल “भूमिहार” लिखा जा रहा है, जबकि उनकी ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान “भूमिहार ब्राह्मण” के रूप में रही है। उनका तर्क है कि नाम से ब्राह्मण पहचान हटाने से उनकी सामाजिक स्थिति, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे को विधानसभा में अतरी के विधायक रोमित कुमार ने उठाया था। उन्होंने बताया कि 1931 की जनगणना में भूमिहार ब्राह्मण की आबादी लगभग 9 लाख दर्ज थी। लेकिन 2011 की जातीय आधारित गणना में इस जाति का नाम सूची से हटा दिया गया था, जिससे समुदाय में असंतोष पैदा हुआ।
सरकार ने कर दिया साफ
लेकिन अब इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि बिहार सरकार समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को महत्व देती है। भूमिहार ब्राह्मण नाम को अब भी सरकारी अभिलेखों में दर्ज रखने से समुदाय के लोग अपनी पहचान और परंपराओं के प्रति आश्वस्त रहेंगे।

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