विकास और उत्पादन साथ-साथ: नई कार्यप्रणाली
पारंपरिक मॉडल में पहले प्रोटोटाइप तैयार किया जाता है और उसके बाद उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन इस बार GTRE ने विकास और निर्माण को एकीकृत करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि चयनित उद्योग प्रारंभिक चरण से ही इंजन के विभिन्न पुर्जों और सब-सिस्टम के निर्माण में शामिल होंगे।
DCPP मॉडल: उद्योग की सक्रिय भागीदारी
इस परियोजना में “डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DCPP)” मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत एक भारतीय कंपनी चाहे वह सार्वजनिक क्षेत्र की हो या निजी को GTRE के साथ साझेदारी में इंजन को डिजाइन से लेकर वास्तविक हार्डवेयर और फिर सीरियल प्रोडक्शन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
AMCA Mk-2 के लिए उच्च क्षमता वाला इंजन
यह इंजन परियोजना उन्नत हाई थ्रस्ट क्लास इंजन (AHTCE) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे विशेष रूप से Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) Mk-2 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान के लिए विकसित किया जा रहा है।
दीर्घकालिक उत्पादन की रूपरेखा
योजना के अनुसार अगले 10 वर्षों में 18 विकासात्मक इंजन तैयार कर उनका व्यापक परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण चरण के सफल होने के बाद कम से कम 200 इंजनों के सीरियल उत्पादन की तैयारी की जाएगी। इससे भारत को भविष्य में विदेशी इंजन आयात पर निर्भरता कम करने और अपनी सामरिक स्वायत्तता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तकनीकी क्षमता और प्रदर्शन
प्रस्तावित इंजन की थ्रस्ट क्षमता 110 से 130 किलो न्यूटन के बीच होगी, जो आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकताओं के अनुरूप है। यह पहल केवल एक रक्षा परियोजना नहीं है, बल्कि “डिजाइन-टू-प्रोडक्शन” क्षमता को देश के भीतर विकसित करने का प्रयास है।
यदि यह कार्यक्रम सफल होता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो सकता है जो स्वदेशी रूप से उन्नत लड़ाकू विमान इंजन विकसित और उत्पादित करते हैं। इस कदम के साथ भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह एयरोस्पेस तकनीक में न केवल आत्मनिर्भर बनना चाहता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनना चाहता है।

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