8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 3 नई खुशखबरी?

नई दिल्ली। देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर्स इस समय एक ही सवाल का जवाब जानना चाहते हैं की 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा? क्योंकि यही वह अहम संख्या है जो बेसिक वेतन और पेंशन में वास्तविक बढ़ोतरी की दिशा तय करेगी।

फिटमेंट फैक्टर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

फिटमेंट फैक्टर दरअसल वह गुणांक है, जिसके जरिए मौजूदा बेसिक पे को नई वेतन संरचना में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। अब कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में इसे कम से कम 2.86 से 3.25 के बीच रखा जाए। अगर ऐसा होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन में हजारों रुपये की सीधी बढ़ोतरी संभव है। इसका असर न केवल वेतन पर, बल्कि डीए, एचआरए और पेंशन जैसी अन्य सुविधाओं पर भी पड़ेगा।

तीन सदस्यीय पैनल की तैयारी तेज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के लिए गठित तीन सदस्यीय पैनल अपनी सिफारिशों पर गहन विचार-विमर्श कर रहा है। दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में आयोग का कार्यालय स्थापित हो चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि सिफारिशों की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से गति पकड़ रही है।

25 फरवरी 2026 को अहम बैठक

इसी बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए National Council-Joint Consultative Machinery (NC-JCM) की नेशनल काउंसिल स्टाफ साइड ने 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को एकजुट कर सरकार के सामने एक “यूनिफाइड मेमोरेंडम” प्रस्तुत करना है। माना जा रहा है कि इस मेमोरेंडम में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में सुधार, पेंशन समानता और भत्तों के पुनर्गठन जैसी प्रमुख मांगें शामिल हो सकती हैं।

क्या हो सकता है संभावित असर?

यदि फिटमेंट फैक्टर 3.0 या उससे अधिक तय होता है, तो:

न्यूनतम बेसिक वेतन में बड़ी छलांग संभव

ग्रुप C और ग्रुप B कर्मचारियों को विशेष लाभ

पेंशनर्स की मासिक आय में उल्लेखनीय सुधार

उपभोक्ता खर्च में वृद्धि से अर्थव्यवस्था को भी गति

हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा।

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