जखारोवा ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के दावे नए नहीं हैं। उनका कहना है कि अमेरिका स्वतंत्र देशों पर जबरन हुक्म चलाने का अधिकार नहीं रखता।
अमेरिका का दावा और भारत की खामोशी
हाल ही में अमेरिका ने कहा था कि भारत ने रूसी तेल की बजाय अमेरिकी और वेनेजुएला के तेल को प्राथमिकता दी है। इसके चलते अमेरिका ने अपने टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिए। भारत की तरफ से इन दावों की न तो पुष्टि हुई और न ही खंडन। सरकार ने केवल यह कहा है कि ऊर्जा खरीद पूरी तरह से “राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा” पर आधारित होती है।
आयात में गिरावट
कई रिपोर्ट्स ये बतलाती हैं की अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी तेल आयात जनवरी में गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें अमेरिकी दबाव और नए व्यापार समझौतों का असर दिखता है।
मॉस्को का भरोसा
हालांकि अमेरिका लगातार दबाव डाल रहा है, रूस का भरोसा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा। मॉस्को का कहना है कि जब तक भारत को रियायती दरों पर ऊर्जा की जरूरत है, तब तक यह रणनीतिक साझेदारी कायम रहेगी। इस बयान के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भारत और रूस की ऊर्जा साझेदारी मजबूत बनी हुई है, जबकि अमेरिका के दावे फिलहाल हवा में ही रह गए हैं।
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