भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार: 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर की प्लानिंग!

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के केंद्रीय बजट में भारतीय रेलवे के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना का एलान किया है। इन कॉरिडोरों की कुल लंबाई लगभग 4,000 किलोमीटर होगी और इनके लिए अनुमानित निवेश 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है। नए बुलेट ट्रेन मार्गों का उद्देश्य देश के प्रमुख आर्थिक और तकनीकी केंद्रों को तेज़ और कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

हाई-स्पीड रेल की खासियत

इन नए कॉरिडोरों पर चलने वाली बुलेट ट्रेनें 250 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति से दौड़ेंगी। इससे शहरों के बीच यात्रा का समय मौजूदा ट्रेन सेवाओं की तुलना में आधा या उससे भी कम हो जाएगा। इन रूट्स से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि कारोबार, पर्यटन और रोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे।

सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर और अनुमानित यात्रा समय

दिल्ली – वाराणसी: सफर बुलेट ट्रेन में केवल 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा।

चेन्नई – हैदराबाद: दक्षिण भारत में तेज कनेक्टिविटी, यात्रा समय लगभग 2 घंटे 55 मिनट।

बेंगलुरु – हैदराबाद: प्रमुख टेक हब्स के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। अनुमानित समय लगभग 2 घंटे।

पुणे – हैदराबाद: मुंबई-हैदराबाद मार्ग के लिए अप्रत्यक्ष तेज़ कनेक्शन। अनुमानित समय 1 घंटा 55 मिनट।

चेन्नई – बेंगलुरु: दोनों महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी केंद्रों को जोड़ते हुए, बुलेट ट्रेन 1 घंटा 13 मिनट में यात्रा पूरी कर देगी।

मुंबई – पुणे: महाराष्ट्र के इन शहरों के बीच सफर अब 48 मिनट में पूरा होगा, जो कम्यूटिंग को बेहद आसान बनाएगा।

वाराणसी – सिलीगुड़ी (पटना होते हुए): पूर्वोत्तर भारत को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। अनुमानित यात्रा समय 2 घंटे 55 मिनट।

पहले कॉरिडोर का हाल

भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर निर्माणाधीन है। यह जापानी तकनीक पर आधारित है और इसकी अधिकतम गति 320 किमी/घंटा होगी। अनुमानित यात्रा समय लगभग 2 घंटे 7 मिनट।

क्या बदल जाएगा?

इन सात नए कॉरिडोरों से पूरे देश में शहरों के बीच दूरी घटेगी, यात्रा समय कम होगा, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और देश के विभिन्न हिस्सों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

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