हाल ही में रूस के उपप्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने बातचीत के पहले राउंड को सफल बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के लिए 160 करोड़ की आबादी वाला बड़ा बाजार तैयार होगा।
व्यापार में नए अवसर
अगर यह ‘प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट’ (PTA) में तब्दील होता है, तो भारत और रूस के निर्यातक और उत्पादक वैश्विक बाजार में आसानी से पहुंच पाएंगे। इस डील से रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान सहित यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के देशों के साथ फ्री ट्रेड को बढ़ावा मिलेगा।
2030 तक व्यापार का लक्ष्य
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 100 अरब डॉलर के पार पहुँच सकता है, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा 68.7 अरब डॉलर है।
आर्थिक और राजनीतिक फायदे
डील से न केवल भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि स्थानीय मुद्रा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक दबाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
रोजगार और निवेश में होगी बढ़ोत्तरी
रूसी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। इससे नए रोजगार के अवसर बनेंगे और विभिन्न सेक्टरों में नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। इस तरह, यह डील केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती देने वाला कदम साबित होगी।

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