एसटीईएम संस्थानों पर रहेगा खास फोकस
नए गर्ल्स हॉस्टल विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़े उच्च शिक्षण संस्थानों के पास स्थापित किए जाएंगे। अब तक इन विषयों में पढ़ाई या शोध करने वाली छात्राओं को हॉस्टल सुविधा न मिलने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों की छात्राओं के लिए यह एक बड़ी बाधा थी। हॉस्टल बनने से छात्राओं को न सिर्फ रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि वे बिना किसी असुरक्षा या अतिरिक्त खर्च की चिंता किए पढ़ाई और रिसर्च पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
उच्च शिक्षा में बढ़ेगा छात्राओं का नामांकन
यूपी में इस समय उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 54.76 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें से करीब 29.80 लाख छात्राएं हैं। सरकार के इस फैसले से आने वाले समय में छात्राओं का नामांकन और बढ़ने की उम्मीद है। हॉस्टल की सुविधा मिलने से मेधावी छात्राएं अपने जिले या आसपास के जिलों के अच्छे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आसानी से प्रवेश ले सकेंगी।
केंद्र सरकार देगी आर्थिक सहयोग
केंद्र सरकार राज्यों को गर्ल्स हॉस्टल निर्माण के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना और पूंजीगत सहायता के जरिए प्रोत्साहित करेगी। इसके तहत कुल परियोजना लागत का लगभग 40 से 80 प्रतिशत तक खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना आसान बनेगा।
बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की मेरिट सूचियों में पहले से ही छात्राओं का दबदबा रहता है। हॉस्टल सुविधा मिलने के बाद और अधिक मेधावी छात्राएं उच्च शिक्षा की ओर आकर्षित होंगी। इससे न सिर्फ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।

0 comments:
Post a Comment