सौदे का वित्तीय आयाम
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह डील लगभग 78,000 करोड़ रुपये की है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा Air LORA और Ice Breaker मिसाइलों के निर्माण और आपूर्ति पर केंद्रित है। यह समझौता नवंबर 2025 में भारत और इजरायल के रक्षा सचिवों के बीच हुए MoU के बाद अंतिम रूप में आगे बढ़ा।
Air LORA: दुश्मन के क्षेत्र में बिना घुसे सटीक हमला
Air LORA एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 400 किलोमीटर से अधिक है और यह Mach 5 की सुपरसोनिक रफ्तार से अपने लक्ष्य को मार सकती है। भारतीय लड़ाकू विमानों में इसे तैनात किया जा सकता है और यह दुश्मन के एयर डिफेंस रेंज में आए बिना हमला कर सकती है।
सबसे बड़ी बात यह है की इस मिसाइल को दागने के बाद किसी गाइडिंग की आवश्यकता नहीं होती। यह GPS-सिग्नल बाधा या जामिंग के बावजूद अपने लक्ष्य तक सटीक पहुंचती है। इस तकनीक से भारत की हवाई क्षमताएं और अधिक शक्तिशाली होंगी, खासकर पाकिस्तान और चीन की सीमा पर।
Ice Breaker: AI और स्मार्ट तकनीक से लैस क्रूज मिसाइल
Ice Breaker मिसाइल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से लैस है। इसका उद्देश्य दुश्मन के लक्ष्य को खुद पहचानना और ट्रैक करना है। यह मिसाइल समुद्र या जमीन के बेहद करीब उड़ती है, जिससे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है।
इसे हल्के विमान, हेलीकॉप्टर और छोटे जहाजों से भी लॉन्च की जा सकती है। लक्ष्य की स्थिति बदलने पर भी मिसाइल उसे ढूंढकर निष्प्रभावित कर देती है। इस प्रकार, Ice Breaker मिसाइल भारत की समुद्री और सतही रक्षा क्षमताओं को नई ऊँचाई पर ले जाएगी।
इस डील से भारत की रक्षा प्रणाली में स्वदेशी उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीक का समावेश होगा। साथ ही, यह पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच भारत को सटीक और आधुनिक स्ट्रैटेजिक हथियार उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
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