कावेरी इंजन का नया संस्करण
पहला कावेरी इंजन मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों के लिए विकसित किया गया था। नए KDE संस्करण को ड्रोन, जहाजों के प्रोपल्शन और औद्योगिक उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि अब भारत को उच्च-तकनीकी जेट इंजनों के लिए अमेरिका या रूस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
गोदरेज एयरोस्पेस की भूमिका
गोदरेज केवल पुर्जों का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि पूरे इंजन का इंटीग्रेशन और टेस्टिंग भी संभाल रहा है। D2 और D3 इंजनों को चरम परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा। इसमें ऊँचाई वाले ठंडे इलाके, रेगिस्तान जैसी गर्म जगहें और लगातार घंटों तक चलने की टेस्टिंग शामिल है।
KDE इंजन की खासियत
बहु-उपयोगी: घातक यूसीएवी ड्रोन और अन्य प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकेगा।
सीरियल प्रोडक्शन तैयार: D1, D2 और D3 इंजनों को सीधे इस्तेमाल के लिए बनाया गया है।
स्वदेशी तकनीक: घूमने वाले हिस्से और गर्म हिस्से पूरी तरह भारत में विकसित हैं।
अंतिम परीक्षण और सर्टिफिकेशन
D2 और D3 इंजनों का परीक्षण ग्राउंड और एंड्योरेंस ट्रायल के तहत किया जाएगा। चरम तापमान, लंबे समय तक लगातार काम करने और अन्य कठोर परिस्थितियों में इसका मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षण पूरा होने के बाद वर्ष 2026 में KDE इंजन को सर्टिफिकेशन मिल जाएगा, जिससे यह पूर्णतः स्वदेशी और बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य बन जाएगा।
भविष्य की क्या है दिशा?
कावेरी डेरिवेटिव इंजन KDE भारत के एयरोस्पेस रोडमैप का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले वर्षों में इसका उपयोग ड्रोन, जहाजों और विभिन्न एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा, जिससे भारत का रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र और अधिक मजबूत होगा।

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