सबसे बड़े AI समिट का मंच
16 फरवरी से शुरू हुए इस समिट में टेक्नोलॉजी की दुनिया का सबसे बड़ा मंच तैयार किया गया है। इसमें 65 देशों के प्रतिनिधि और 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स अपनी नवीनतम तकनीकी खोजों और AI समाधानों को पेश कर रहे हैं। यह समिट न केवल तकनीकी नवाचार की दिशा में भारत की प्रगति को दिखाता है, बल्कि देश को वैश्विक AI हब के रूप में स्थापित करने का संदेश भी देता है।
भारत की ताकत और निवेश
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत का विशाल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जनसंख्या आधारित डेटा AI के व्यावहारिक समाधानों को तेजी से विकसित करने में मदद कर रहा है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की हालिया रिसर्च के मुताबिक, अगले 2-3 सालों में AI सेक्टर में करीब 200 बिलियन डॉलर का निवेश भारत में आने की संभावना है।
समावेशी विकास और सतत प्रगति
AI समिट में उद्योग जगत, शोधकर्ता, नीति निर्माता और टेक विशेषज्ञ एक मंच पर हैं। सम्मेलन का फोकस केवल तकनीकी नवाचार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में AI के सकारात्मक प्रभाव पर है। साथ ही, नौकरियों पर पड़ने वाले असर, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और नियमों के साथ नवाचार का संतुलन भी प्रमुख चर्चा के विषय बने।
ग्लोबल साउथ में पहला आयोजन
यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला वैश्विक AI सम्मेलन है। इसमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, लगभग 60 मंत्री और 500 से अधिक AI लीडर्स हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य न केवल भारत की तकनीकी क्षमताओं को उजागर करना है, बल्कि दुनिया के अन्य देशों के साथ जिम्मेदार और समावेशी AI विकास के लिए संवाद बढ़ाना भी है।

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