PM मोदी का बड़ा ऐलान...भारत बनेगा टॉप-3 AI सुपरपावर

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित AI-India Impact Summit 2026 के दौरान स्पष्ट कहा कि भारत को दुनिया की टॉप-3 AI सुपरपावर में शामिल होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के आईटी सेक्टर के लिए खतरा नहीं, बल्कि परिवर्तन और विस्तार का माध्यम है।

AI से बदलेगा IT सेक्टर का स्वरूप

प्रधानमंत्री के अनुसार, AI भारत के पारंपरिक आईटी मॉडल को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे नए आयाम दे रहा है। आउटसोर्सिंग के साथ-साथ अब डोमेन-विशिष्ट ऑटोमेशन, उत्पाद निर्माण और प्लेटफॉर्म आधारित समाधान भारत की नई पहचान बन सकते हैं। उनका अनुमान है कि AI के प्रभाव से 2030 तक भारत का आईटी सेक्टर 400 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।

इंडिया AI मिशन: मजबूत इकोसिस्टम की ओर कदम

सरकार ने IndiaAI Mission के तहत घरेलू AI ढांचे को मजबूत करने की व्यापक रणनीति अपनाई है।

1 .GPU की संख्या लक्ष्य से आगे निकल चुकी है।

2 .20,000 अतिरिक्त GPU जोड़े जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 38,000 से अधिक हो जाएगी।

3 .उच्च स्तरीय GPU लगभग 65 रुपये प्रति घंटा की दर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

यह पहल स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और डेवलपर्स को सस्ती और सुलभ कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध कराकर नवाचार को बढ़ावा देगी।

चार सेक्टर में खास फोकस

AI के उपयोग को स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सस्टेनेबल शहरों जैसे क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए चार सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और पांच नेशनल स्किलिंग सेंटर्स स्थापित किए गए हैं। उद्देश्य है कि AI केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करे।

डिजाइन और रिसर्च पर अगला चरण

प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि अब ध्यान AI के डिजाइन, रिसर्च और डेवलपमेंट पर रहेगा। भारत अपनी जरूरतों और विविधता के अनुरूप समाधान तैयार करेगा। अनुमान है कि AI क्षेत्र में निवेश 200 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच सकता है।

ग्लोबल साउथ में भारत की अगुवाई

AI इम्पैक्ट समिट 2026 को ग्लोबल साउथ में AI पर इतने बड़े स्तर का पहला आयोजन माना जा रहा है। इससे भारत की वैश्विक AI एजेंडा में भूमिका और मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल तकनीकी श्रेष्ठता नहीं, बल्कि जिम्मेदार और समावेशी AI विकसित करना है जो लोगों, ग्रह और प्रगति के संतुलन पर आधारित हो। भारत अब AI क्रांति में सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

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