भारत की ताकत का रौद्र रूप! कावेरी इंजन का टेस्ट रन

नई दिल्ली। भारत ने अपनी एयरोस्पेस तकनीक में एक बार फिर बड़ा कदम रखा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु स्थित GTRE का दौरा कर कावेरी इंजन के नए आफ्टरबर्नर सेक्शन का फुल टेस्ट रन देखा। यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारत अब विदेशी इंजनों पर निर्भर नहीं रहेगा और अपनी लड़ाकू विमानों की ताकत बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम हो रहा है।

ब्रह्मोस की ताकत के साथ नया आफ्टरबर्नर

नए आफ्टरबर्नर को BrahMos Aerospace के सहयोग से तैयार किया गया है। यह तकनीक इंजन में अतिरिक्त ईंधन जलाकर उसे ज़बरदस्त शक्ति देती है। इसका मतलब है कि भारत के फाइटर जेट्स अब सुपरसोनिक रफ्तार और तेज युद्धक मोड़ आसानी से ले सकेंगे।

कावेरी इंजन की ताकत

कावेरी का ड्राई वर्जन ग्राउंड टेस्ट में 49 किलो न्यूटन (kN) थ्रस्ट दे चुका है। पहले वाला आफ्टरबर्नर लगभग 73 kN तक का थ्रस्ट देता था, जबकि नए वर्जन का लक्ष्य 81-83 kN है। इसे भविष्य में मानव रहित और मानवयुक्त लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल करने की योजना है।

आत्मनिर्भर भारत

रक्षा मंत्री ने दौरे के दौरान कहा कि नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सामग्री का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को और तेज़ करेगा। कावेरी इंजन में हो रही प्रगति भारत की डिफेंस ताकत को नई ऊँचाई देगी और देश को वायु सेना में आत्मनिर्भर बनाएगी।

भविष्य की उड़ान

यह कदम दिखाता है कि भारत अब केवल रंगों और तकनीक में ही नहीं, बल्कि सुपरसोनिक लड़ाकू शक्ति में भी अपनी जगह बना रहा है। कावेरी इंजन के साथ भारतीय जेट्स जल्द ही नए मुकाम को छूने वाले हैं।

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