इसी रुख को बरकरार रखते हुए अब भारत रूस के साथ एक बड़े ‘प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट’ (PTA) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस संभावित मेगा डील की पुष्टि रूस के उप प्रधानमंत्री Alexey Overchuk ने मॉस्को में आयोजित एक बिजनेस फोरम के दौरान की।
पहला चरण पूरा, आगे की राह साफ
ओवरचुक के मुताबिक, भारत और Eurasian Economic Union (EAEU) के बीच बातचीत का पहला दौर सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इस यूनियन में रूस के अलावा आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो यह केवल द्विपक्षीय व्यापार नहीं रहेगा, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी बन जाएगा।
2.2 अरब लोगों के बाजार तक पहुंच
इस डील का सबसे बड़ा आकर्षण संयुक्त बाजार की ताकत है। भारत और EAEU के देशों की कुल आबादी मिलाकर लगभग 2.2 अरब लोगों का विशाल उपभोक्ता आधार तैयार होता है। रूसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर होगा, वहीं भारतीय निर्यातकों को भी मध्य एशिया और पूर्वी यूरोप के बाजारों में नई पहुंच मिलेगी।
100 अरब डॉलर का लक्ष्य
पीएम मोदी और पुतिन ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते आर्थिक रिश्तों को दर्शाता है।
ऊर्जा और रक्षा से आगे
अब तक भारत-रूस संबंध मुख्य रूप से ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र पर केंद्रित रहे हैं। लेकिन प्रस्तावित समझौते के तहत फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, मशीनरी, केमिकल्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है। इससे व्यापार का दायरा कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
बदलते वैश्विक समीकरण
2026 का दौर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव का है। एक ओर अमेरिका और यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है, तो दूसरी ओर रूस के साथ आर्थिक संबंध भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में यह संभावित मेगा ट्रेड डील वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नए संतुलन की शुरुआत कर सकती है।

0 comments:
Post a Comment