चौंकाने वाला सर्वे: बंगाल में किसका होगा सत्ता का सिंहासन?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी अब तेज हो गई है। चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अपने उम्मीदवारों और रणनीति पर काम में जुट गई हैं। चुनावी पारा चढ़ने के साथ ही जनता की राय जानने के लिए TV9 बांग्ला ने पांच जिलों पुरुलिया, बांकुड़ा, झारग्राम, पश्चिम मिदनापुर और पश्चिम बर्दवान में पब्लिक ओपिनियन सर्वे कराया।

बांकुड़ा:

बांकुड़ा जिले में भी बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है, लेकिन तृणमूल ने 2024 लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर बाजी पलट ली थी। सर्वे के अनुसार, जिले की 12 विधानसभा सीटों में बीजेपी 6 पर आगे है, तृणमूल 2 पर और बाकी 4 सीटों पर कड़ी टक्कर की संभावना है।

पुरुलिया:

पुरुलिया में बीते लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी का प्रभाव बढ़ता दिखा। 2021 में 9 सीटों में से बीजेपी ने 6 और तृणमूल ने 3 सीटें जीती थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी 6 सीटों पर आगे है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 3 सीटों पर मजबूत स्थिति में है।

झारग्राम:

झारग्राम जिले की 4 सीटों पर सर्वे में तृणमूल कांग्रेस 3 सीटों पर आगे है। इस जिले में बीजेपी पिछली बार कोई भी सीट नहीं जीत पाई थी। बचे हुए एक सीट पर कड़ी टक्कर की संभावना है।

पश्चिम बर्दवान:

पश्चिम बर्दवान में 9 सीटों में तृणमूल और बीजेपी दोनों का प्रदर्शन बराबर दिख रहा है। सर्वे के अनुसार तृणमूल 3 और बीजेपी 3 सीटों पर आगे हैं, जबकि 3 सीटों पर कड़ी टक्कर का अनुमान है।

पश्चिम मिदनापुर:

इस जिले में 15 विधानसभा सीटें हैं। 2021 में तृणमूल ने 13 और बीजेपी ने 2 सीटें जीती थीं। 2024 लोकसभा चुनाव में तृणमूल 14 सीटों पर आगे रही। आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वे के अनुसार तृणमूल 9 सीटों पर आगे है, बीजेपी 1 सीट पर और 5 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।

इन पांच जिलों की कुल 49 विधानसभा सीटों का विश्लेषण करें तो सर्वे के मुताबिक तृणमूल 17 सीटों पर आगे है और बीजेपी 16 सीटों पर। बाकी 16 सीटों पर कड़ी टक्कर के संकेत हैं। इससे माना जा रहा हैं की इस बार बंगाल चुनाव में कांटे की टक्कर होने वाला हैं। 

हालांकि, पब्लिक ओपिनियन सर्वे हमेशा चुनाव के असली नतीजों की गारंटी नहीं देता, लेकिन यह सियासी स्थिति और जनता की प्राथमिकता की झलक जरूर पेश करता है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सर्वे पार्टियों के लिए रणनीति बनाने और मतदाताओं की धड़कन समझने का महत्वपूर्ण संकेत है।

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