1.70 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी पर मंथन
फिलहाल उर्वरक सब्सिडी की राशि कंपनियों को दी जाती है, ताकि किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराई जा सके। यह राशि 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार का मानना है कि यदि यही रकम सीधे किसानों को दी जाए तो व्यवस्था अधिक पारदर्शी और लक्षित बन सकती है।
वर्तमान में 45 किलो यूरिया की बोरी लगभग 266–267 रुपये में और 50 किलो डीएपी (DAP) की बोरी करीब 1,350 रुपये में किसानों को मिलती है। असल बाजार कीमत इससे कहीं अधिक है, जिसका अंतर सरकार सब्सिडी के जरिए वहन करती है।
डायवर्जन और कालाबाजारी पर रोक का प्रयास
सरकार को समय-समय पर शिकायतें मिलती रही हैं कि पर्याप्त आपूर्ति और भारी सब्सिडी के बावजूद किसानों को जरूरत के समय खाद उपलब्ध नहीं हो पाती। कुछ मामलों में सब्सिडी वाली यूरिया के अन्य क्षेत्रों में डायवर्जन या दुरुपयोग की बात भी सामने आती रही है।
ऐसे में सीधे लाभ अंतरण (DBT) के जरिये राशि किसानों के खातों में भेजने का प्रस्ताव इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इस विषय पर नीति विमर्श के लिए Indian Council of Agricultural Research (ICAR) सहित संबंधित संस्थाओं से विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।
आगे की राह क्या हैं?
सरकार का उद्देश्य सब्सिडी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, लक्षित और प्रभावी बनाना है। यदि सीधा हस्तांतरण मॉडल लागू होता है, तो इससे कालाबाजारी और डायवर्जन पर अंकुश लग सकता है। लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों पर तत्काल आर्थिक बोझ न बढ़े।
खाद सब्सिडी को लेकर यह प्रस्ताव कृषि क्षेत्र में एक बड़े ढांचागत बदलाव की दिशा में संकेत देता है। आने वाले समय में व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, लेकिन इतना तय है कि सरकार किसानों तक सहायता सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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