भारत की नई रणनीति ने मचाई हलचल, चीन की नींद उड़ाई!

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती देते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के नजदीक असम में राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से को इस तरह विकसित किया गया है कि जरूरत पड़ने पर वह पूरी तरह हवाई पट्टी की तरह इस्तेमाल किया जा सके। यह बदलाव सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को सुरक्षा दृष्टि से प्राथमिकता दी जा रही है।

क्या खास है इस नई एयर स्ट्रिप में?

असम के मोरान इलाके में तैयार यह विशेष हवाई पट्टी लगभग 4 किलोमीटर से अधिक लंबी है। इसकी स्थिति ऐसी जगह पर है, जहां से चीन सीमा तक तेजी से पहुंचा जा सकता है। यही नहीं, यह म्यांमार की दिशा में भी सामरिक दृष्टि से उपयोगी है। 1962 के युद्ध के दौरान जिन बुनियादी कमियों ने भारत को मुश्किल में डाला था, अब उन्हीं क्षेत्रों में मजबूत सड़क और एयर कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है।

किसने किया है इसका निर्माण?

इस परियोजना को National Highways & Infrastructure Development Corporation Limited ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर तैयार किया है। सामान्य दिनों में यह सड़क की तरह उपयोग होगी, लेकिन आपात स्थिति में इसे तुरंत रनवे में बदला जा सकता है।

कौन-कौन से विमान उतर सकते हैं?

यह हवाई पट्टी हल्के और भारी दोनों प्रकार के विमानों के संचालन के लिए सक्षम है। यहां आधुनिक लड़ाकू विमानों से लेकर बड़े सैन्य परिवहन विमान तक लैंडिंग और टेकऑफ कर सकते हैं। इसमें Rafale, Tejas, और Sukhoi Su-30MKI जैसे फाइटर जेट्स शामिल हैं। वहीं भारी उपकरण और सैनिकों की तैनाती के लिए C-17 Globemaster III और C-130J Super Hercules जैसे बड़े विमान भी यहां उतर सकते हैं।

रणनीतिक बढ़त क्यों मानी जा रही है?

चीन ने अपनी ओर सीमा के पास एयरबेस और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। ऐसे में भारत की यह पहल संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। जरूरत पड़ने पर कुछ ही घंटों में जवानों और संसाधनों को अग्रिम मोर्चे तक पहुंचाया जा सकेगा।

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