बिहार में 'रैयती जमीन' को लेकर बड़ा अपडेट, नई व्यवस्था लागू

पटना। बिहार सरकार ने रैयती भूमि के निबंधन में नई व्यवस्था लागू की है, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगी। नए नियम के अनुसार, निबंधन के समय जमीन के पक्षकार यानी खरीदार या विक्रेता, अपनी इच्छा के मुताबिक, भूमि की संपूर्ण आधिकारिक जानकारी दस दिनों के भीतर प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा रैयती भूमि पर वित्त वर्ष 2026-27 से मिलेगी।

निबंधन प्रक्रिया में बदलाव

राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस नई व्यवस्था का आदेश जारी किया है। इसके तहत सभी समाहर्ता निर्देशित हैं कि निबंधन और म्यूटेशन के समय भूमि संबंधी सभी विवरण सही और स्पष्ट होने चाहिए। भूमि से जुड़ी जानकारी के अभाव में अक्सर विवाद और गलत निबंधन होते थे। नई व्यवस्था में पक्षकार को पूर्व जानकारी लेने का विकल्प दिया गया है।

ई-निबंधन पोर्टल पर जानकारी

भूमि की अपडेट रिपोर्ट पाने के लिए आवेदक को ई-निबंधन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें शामिल हैं: निबंधन कार्यालय, अंचल, मौज, थाना, खाता और खेसरा संख्या, भूमि का क्षेत्रफल, चौहद्दी, जमाबंदी संख्या, जमाबंदी धारक, क्रेता और विक्रेता का नाम और भूमि का प्रकार। यदि पक्षकार अपडेट जानकारी लेने का विकल्प नहीं चुनता, तो निबंधन सामान्य प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

10 दिन में रिपोर्ट और अलर्ट

पक्षकार ने जानकारी का विकल्प चुना तो अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी जमीन की जांच करेंगे और रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इस प्रक्रिया की सूचना आवेदक और अधिकारियों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। यदि दस दिनों में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो यह माना जाएगा कि पक्षकार द्वारा दी गई जानकारी पर्याप्त है और निबंधन स्वतः आगे बढ़ जाएगा।

विशेष मामलों का ध्यान

कोर्ट द्वारा रोक लगी जमीन, सरकारी भूखंड और भू-हदबंदी विवाद वाले भूखंडों का निबंधन साफ्टवेयर में दर्ज जानकारी के अनुसार किया जाएगा।

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