रक्षा संबंधों का नया समीकरण
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग कोई नया नहीं है। भारतीय वायुसेना में शामिल Dassault Rafale लड़ाकू विमान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक हैं। अब यदि भारत 114 नए विमानों की बड़ी डील की ओर बढ़ता है, तो यह सौदा केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेगा। अक्सर ऐसे समझौते तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और पारस्परिक रक्षा जरूरतों से भी जुड़े होते हैं। इसी संदर्भ में भारत के स्वदेशी रॉकेट सिस्टम की भी चर्चा तेज हुई है।
क्या है पिनाका और क्यों खास है?
Pinaka multi-barrel rocket launcher एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है कम समय में भारी मात्रा में रॉकेट दागने की क्षमता। युद्धक्षेत्र में यह दुश्मन के बड़े इलाके को तेजी से कवर कर सकता है। फ्रांस इस रॉकेट सिस्टम को खरीदने पर विचार कर रहा हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताएं: अलग-अलग रेंज वाले संस्करण (लगभग 90 किमी से 120+ किमी तक), भविष्य में 300 किमी तक मारक क्षमता का लक्ष्य हैं।
वैश्विक तुलना में स्थिति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तुलना अमेरिकी M142 HIMARS और रूसी Tornado-S से की जाती है। HIMARS अपनी सटीकता और नेटवर्किंग क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि पिनाका की पहचान लागत-प्रभावशीलता और लगातार उन्नयन से बन रही है। भारत के लिए बड़ा फायदा यह है कि पिनाका पूरी तरह स्वदेशी सप्लाई चेन पर आधारित है। इसका मतलब है कि निर्यात के समय किसी तीसरे देश की तकनीकी अनुमति की बाध्यता कम होती है।
फ्रांस की संभावित दिलचस्पी
फ्रांस अपनी रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। जब तक उसका दीर्घ दूरी वाला घरेलू सिस्टम पूरी तरह तैयार नहीं होता, तब तक एक भरोसेमंद और अपेक्षाकृत किफायती विकल्प उसके लिए उपयोगी हो सकता है। यहीं भारत को अवसर दिखता है। यदि फ्रांस जैसे विकसित और तकनीकी रूप से सक्षम देश द्वारा भारतीय प्रणाली को अपनाया जाता है, तो यह केवल एक सौदा नहीं होगा, यह भारत की रक्षा तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय विश्वास का प्रमाण होगा।

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