अमेरिका-रूस का सीक्रेट डील! चीन में खलबली, सोने में महाधड़ाम तय?

नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में हलचल तेज है। संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच संभावित आर्थिक समझौते की खबरों ने बाजारों में नई बहस छेड़ दी है। खासकर तब, जब चर्चा इस बात की हो कि रूस दोबारा डॉलर आधारित वैश्विक भुगतान व्यवस्था में लौट सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सोने की कीमतों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसला सोना

कुछ हफ्ते पहले तक सोना निवेशकों का सबसे पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर को लेकर अविश्वास ने इसकी कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया था। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। ऊंचाई से गिरावट यह संकेत दे रही है कि बाजार नए संकेतों को गंभीरता से ले रहा है।

डॉलर की वापसी हो सकती है 

साल 2022 में पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस को SWIFT सिस्टम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद मॉस्को ने वैकल्पिक भुगतान तंत्र और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दिया। इसी दौर में BRICS देशों ने भी डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति तेज की। लेकिन यदि रूस दोबारा डॉलर आधारित ट्रेड सिस्टम में लौटता है, तो यह डी-डॉलराइजेशन की मुहिम को झटका दे सकता है। इससे डॉलर की वैश्विक स्थिति मजबूत हो सकती है और यही बिंदु सोने के लिए चुनौती बन सकता है।

क्यों गिर सकता है सोना का भाव ?

पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने डॉलर जोखिम से बचने के लिए सोने का भंडार बढ़ाया। अगर डॉलर फिर मजबूत होता है, तो यह ट्रेंड धीमा पड़ सकता है। आम तौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना दबाव में आता है क्योंकि दोनों को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। निवेशक सोने से पैसा निकालकर डॉलर आधारित बॉन्ड या अन्य एसेट में लगा सकते हैं।

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