सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो इस डील पर अगले महीने, यानी मार्च 2026 में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि डील का ढांचा तैयार है और अब इसे कानूनी रूप देने के लिए एक विशेष टीम अमेरिका के दौरे पर जाएगी।
वाशिंगटन में होगा अंतिम मोल-भाव
अगले हफ्ते भारतीय अधिकारियों की टीम वाशिंगटन में अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बैठक करेगी। इस टीम का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। मुख्य उद्देश्य डील के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है। इससे पहले दोनों देशों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगातार बातचीत चल रही थी। इस फिजिकल मीटिंग का काम इन चर्चाओं को निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा।
ढांचा तैयार, अब कानूनी मुहर
इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने साझा बयान जारी किया था, जिसमें डील का रूपरेखा तय करने की जानकारी दी गई थी। वाणिज्य सचिव ने इसे सरल शब्दों में समझाया कि अब मकान का नक्शा तो पास हो गया है, लेकिन ईंट-गारे यानी पक्के कागजात तैयार करना बाकी है। कानूनी मसौदा तैयार होने के बाद ही दोनों पक्ष हस्ताक्षर कर सकते हैं।
मार्च में लक्ष्य, पर सस्पेंस बरकरार
सरकार का रुख सकारात्मक है और दोनों पक्ष चाहते हैं कि समझौते को मार्च में पूरा कर लिया जाए। हालांकि वाणिज्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कोई अंतिम समय सीमा तय नहीं की गई है। कानूनी दस्तावेजों में कई पेचीदगियां होती हैं, जिन्हें सुलझाना जरूरी है। इस प्रकार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की राह अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, और अगले महीने के लिए बड़ी उम्मीदें हैं।

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