यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण योजना नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के यातायात मानचित्र को बदलने की तैयारी है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड के बीच सीधा संपर्क बनने से उत्तर प्रदेश की भौगोलिक दूरी घटेगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
किन शहरों को मिलेगा सीधा लाभ?
प्रस्तावित कॉरिडोर बरेली, आगरा और झांसी जैसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ते हुए ललितपुर तक पहुंचेगा। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र सीधे प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी जिलों से कनेक्ट हो सकेगा। योजना के तहत जहां पहले से चौड़ी सड़कें मौजूद हैं, उन्हें और उन्नत बनाया जाएगा, जबकि जरूरत वाले हिस्सों में नए निर्माण कार्य किए जाएंगे। इससे यात्रा का समय घटेगा और लंबी दूरी की आवाजाही अधिक सुविधाजनक बनेगी।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क बनेगा और मजबूत
प्रदेश में पहले से विकसित हो रहे बड़े एक्सप्रेसवे इस नए कॉरिडोर से जुड़ेंगे। इसका परिणाम यह होगा कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा सड़क नेटवर्क तैयार होगा, जिसमें पूरब से लेकर पश्चिम और बुंदेलखंड तक निर्बाध संपर्क संभव होगा। जब अलग-अलग मार्ग एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तो भारी वाहनों की आवाजाही आसान होगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा फायदा व्यापार, कृषि और छोटे उद्योगों को मिलेगा। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। माल ढुलाई की लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
इस संदर्भ में बजट और भविष्य की योजना
इस नए कॉरिडोर के निर्माण के लिए करीब 7 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख राजमार्गों और एक्सप्रेसवे को एक साझा नेटवर्क में जोड़ा जाए।
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