आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स को मिलेगा लाभ
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा वर्कर्स लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही थीं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह संकेत मिला है कि सरकार इस दिशा में ठोस निर्णय लेने जा रही है। सरकार का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन कर्मचारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
शिक्षामित्र और अनुदेशकों पर भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उनके लिए भी व्यावहारिक और स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। इससे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हजारों कर्मियों को राहत मिलने की संभावना है।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा पहले से लागू
सरकार ने यह भी बताया कि इन कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ पहले ही दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में इलाज के लिए आर्थिक चिंता आड़े न आए। इससे पहले निराश्रित महिला और वृद्धा पेंशन में वृद्धि की घोषणा भी की जा चुकी है, जिससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा और मजबूत हुआ है।
सीएम ने आर्थिक प्रगति का हवाला दिया
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की जीडीपी लगभग 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो पिछले आठ वर्षों में बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेश्यो में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है और राज्य अब राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) की स्थिति में है।
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