भारत-इजरायल की बड़ी डिफेंस डील? पाकिस्तान के उड़े होश

नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पिछले एक दशक में नई ऊँचाइयों पर पहुँचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान संभावित रक्षा सौदों को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है, लेकिन जिन प्रणालियों पर बातचीत की अटकलें हैं, वे भारत की वायु रक्षा क्षमता को कई गुना मजबूत कर सकती हैं।

बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा की दिशा में कदम

भारत लंबे समय से एक प्रभावी, बहु-स्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस संदर्भ में इजरायल की प्रसिद्ध Iron Dome प्रणाली पर ध्यान केंद्रित है। यह सिस्टम कम दूरी से दागे गए रॉकेट और मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय करने के लिए जाना जाता है। यदि इसे सीधे आयात करने के बजाय तकनीक हस्तांतरण के साथ ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत शामिल किया जाता है, तो यह भारत की स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को गति दे सकता है।

इसके साथ ही मध्यम दूरी की खतरों से निपटने के लिए David's Sling और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विरुद्ध Arrow missile defense system जैसे सिस्टम भी चर्चा में हैं। ये प्रणालियाँ मिलकर एक ऐसी सुरक्षा ढाल बना सकती हैं, जो अलग-अलग दूरी और ऊँचाई से आने वाले खतरों को क्रमबद्ध तरीके से निष्क्रिय कर सके।

लेजर आधारित रक्षा: भविष्य की तैयारी

परंपरागत मिसाइल इंटरसेप्टर के अलावा, इजरायल का Iron Beam लेजर सिस्टम भी खास आकर्षण का केंद्र है। यह उच्च-ऊर्जा लेजर के माध्यम से ड्रोन, मोर्टार और रॉकेट जैसे हवाई खतरों को कम लागत में निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस प्रकार की तकनीक आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप मानी जा रही है।

प्रिसिशन स्ट्राइक क्षमता में बढ़ोतरी

हवाई हमलों की सटीकता बढ़ाने के लिए SPICE गाइडेंस किट और अन्य स्टैंड-ऑफ हथियार भी संभावित सौदों का हिस्सा हो सकते हैं। ये हथियार दुश्मन की सीमा में प्रवेश किए बिना लंबी दूरी से सटीक वार करने में सक्षम बनाते हैं।

इसके अलावा लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियाँ भारत के रणनीतिक संतुलन को मजबूत कर सकती हैं। यदि इजरायली तकनीक के साथ नई पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइलों का समावेश होता है, तो यह वायुसेना के लिए बड़ी सामरिक बढ़त साबित हो सकता है।

हालांकि, जब तक दोनों देशों की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इन सभी चर्चाओं को संभावनाओं के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। फिर भी इतना स्पष्ट है कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा साझेदारी भविष्य में और अधिक गहरी और व्यापक होती दिखाई दे रही है।

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