अमेरिका का बड़ा कदम: जापान में तैनात करेगा F-35A, चीन में खलबली!

न्यूज डेस्क। पूर्वोत्तर एशिया में सुरक्षा संतुलन को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने एक अहम सैन्य फैसला लेते हुए जापान में पहली बार F-35A फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमानों की स्थायी तैनाती का ऐलान किया है। ये अत्याधुनिक फाइटर जेट उत्तरी जापान के मिसावा एयर बेस पर तैनात किए जाएंगे, जहां वे अमेरिकी वायुसेना के 35वें फाइटर विंग के तहत पुराने F-16CM विमानों की जगह लेंगे।

यह कदम सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है। खासतौर पर चीन, रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के बीच इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है।

F-16 से F-35 तक: मिशन वही, ताकत ज्यादा

अब तक मिसावा एयर बेस पर तैनात F-16CM फाइटर जेट्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को दबाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि F-16 को मूल रूप से हवा से हवा में लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन समय के साथ उसमें सीमित एयर डिफेंस सप्रेशन क्षमताएं जोड़ी गईं।

इसके उलट F-35A को शुरू से ही आधुनिक, जटिल और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क को निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी स्टेल्थ तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एडवांस सेंसर इसे इस भूमिका के लिए कहीं ज्यादा खतरनाक बनाते हैं

जापान और अमेरिका, दोनों को होगा फायदा

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि जापान में F-35A की तैनाती से अमेरिका और जापान की वायु सेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल और मजबूत होगा। जापान पहले से ही F-35 कार्यक्रम का हिस्सा है, जबकि वह F-16 का इस्तेमाल नहीं करता। ऐसे में साझा प्लेटफॉर्म से संयुक्त अभ्यास और वास्तविक अभियानों में समन्वय बेहतर होगा।

मिसावा एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी यूनिट्स को अक्सर ऐसे इलाकों में ऑपरेशन करना पड़ता है, जहां रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश जमीन आधारित एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी निर्भरता रखते हैं। खासकर उत्तर कोरिया का एयर डिफेंस नेटवर्क तेजी से आधुनिक हो रहा है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में यह तैनाती और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

चीन फैक्टर: असली वजह क्या है?

इस पूरी तैनाती के पीछे सबसे बड़ा कारण चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत को माना जा रहा है। चीन लगातार अपनी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर फ्लीट का विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में पहला सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर ऑपरेशनल करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसे देखते हुए भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों को और ज्यादा उन्नत और बड़ी संख्या में प्लेटफॉर्म्स की जरूरत पड़ेगी।

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