यूपी सरकार का बड़ा कदम, किसानों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और फसलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब किसानों को भारी अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध कराएगी, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और उत्पादन में बढ़ोतरी हो। 

कृषि विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए जिप्सम वितरण योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 25,307 टन जिप्सम किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। खास बात यह है कि किसानों को इसका केवल 25 प्रतिशत खर्च ही देना होगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत राशि सरकार अनुदान के रूप में देगी।

मिट्टी की सेहत सुधारने पर सरकार का जोर

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार रासायनिक खादों के उपयोग और असंतुलित खेती के कारण मिट्टी में कई जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो रही है। खासकर सल्फर और कैल्शियम की कमी से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होता है। सरकार का मानना है कि जिप्सम के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा।

मिट्टी के लिए जिप्सम क्यों है जरूरी?

जिप्सम में लगभग 70 प्रतिशत कैल्शियम सल्फेट पाया जाता है। यह मिट्टी में सल्फर और कैल्शियम की कमी को दूर करने में मदद करता है। कृषि विभाग के अनुसार सल्फर की कमी होने पर पौधों की नई पत्तियां पीली या सफेद पड़ने लगती हैं और तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा कम हो जाती है। वहीं कैल्शियम की कमी से पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे वे मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व सही तरीके से नहीं ले पाते। जिप्सम के इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है और पानी का प्रवाह भी बेहतर होता है।

उत्पादन में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

कृषि विभाग का दावा है कि जिप्सम के प्रयोग से फसलों की उत्पादकता में 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं, धान, गन्ना, दलहन और तिलहन जैसी फसलों में जिप्सम का उपयोग काफी लाभकारी साबित हो सकता है।

दो योजनाओं के तहत होगा वितरण

सरकार ने जिप्सम वितरण के लिए दो अलग-अलग योजनाओं के तहत लक्ष्य तय किया है। इनमें 14,586 टन जिप्सम केंद्रीय सहायता प्राप्त योजना के तहत वितरित किया जाएगा, जबकि 10,721 टन जिप्सम राज्य योजना के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इस योजना का लाभ केवल पंजीकृत किसानों को मिलेगा। प्रत्येक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक अनुदान का फायदा उठा सकेगा।

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