सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, यह यात्रा सिर्फ छुट्टी नहीं मानी जाएगी, बल्कि इसे ऑन-ड्यूटी माना जाएगा। यात्रा में शुक्रवार और शनिवार की रात का ठहराव शामिल होना चाहिए। इस दौरान कर्मचारियों को आसपास के कम से कम तीन पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना होगा।
1. हर तीन महीने में मिलेगा घूमने का मौका
नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी हर तीन महीने में एक बार दो दिन की यात्रा कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें अपने गृह जिले और वर्तमान पोस्टिंग वाले जिले से अलग किसी दूसरे जिले के पर्यटन स्थल पर जाना होगा। सरकार चाहती है कि कर्मचारी अपने परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी करीब से जानें।
2. छुट्टी नहीं, ऑन-ड्यूटी माना जाएगा समय
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यात्रा की अवधि को सामान्य अवकाश नहीं माना जाएगा। यानी कर्मचारी की यह ट्रिप सरकारी ड्यूटी का हिस्सा मानी जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इस दौरान कोई भी अधिकारी किसी प्रकार की आधिकारिक बैठक, निरीक्षण या समीक्षा कार्य नहीं करेगा। इसका मकसद केवल पर्यटन और स्थानीय जगहों को बढ़ावा देना है।
3. कम चर्चित पर्यटन स्थलों को मिलेगा फायदा
बिहार में कई ऐसे ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थल हैं जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर नहीं आ सके हैं। सरकार की कोशिश है कि कर्मचारियों की यात्राओं के जरिए इन जगहों को पहचान मिले और वहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ें। इसके साथ ही स्थानीय होमस्टे, होटल और छोटे कारोबारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन को सरकारी विश्राम गृहों और निजी होटलों के साथ बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
4. यात्रा के बाद देनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने इस योजना को केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं रखा है। यात्रा से लौटने के बाद कर्मचारियों को एक फीडबैक रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में उन्हें घूमे गए स्थानों की तस्वीरें, वहां की सुविधाओं की स्थिति और जरूरी सुधारों के सुझाव देने होंगे। इससे सरकार को पर्यटन स्थलों की कमियों को समझने और उन्हें बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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