केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, महिलाओं के हाथ आई 3 नई खुशखबरी

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राजधानी दिल्ली के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी महिला डॉक्टरों को सौंपी है। यह पहली बार है जब देश के इतने बड़े तृतीयक चिकित्सा संस्थानों का नेतृत्व एक साथ महिला चिकित्सकों के हाथ में आया है। इस फैसले को स्वास्थ्य क्षेत्र में महिला नेतृत्व को मजबूत करने और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

किन अस्पतालों की कमान मिली महिलाओं को?

नए आदेश के तहत तीन प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी अनुभवी महिला डॉक्टरों को दी गई है:

1 .अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और आरएमएल अस्पताल: 

नेतृत्व: डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद

2 .लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज

नेतृत्व: डॉ. हिमानी आहलूवालिया

3 .वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल

नेतृत्व: डॉ. कविता रानी शर्मा

इन नियुक्तियों के साथ दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों का प्रशासन अब महिला नेतृत्व के हाथों में आ गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का ऐतिहासिक कदम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई इन नियुक्तियों को स्वास्थ्य प्रशासन में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब दिल्ली के प्रमुख तृतीयक अस्पतालों की कमान एक साथ महिला डॉक्टरों को सौंपी गई है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देता है।

अनुभव और जिम्मेदारी से भरपूर नेतृत्व

नियुक्त की गई तीनों महिला डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्रों में लंबा अनुभव रखती हैं। डॉ. अखिलांडेश्वरी प्रसाद ने चिकित्सा शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में वर्षों तक योगदान दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी प्राथमिकता मरीज-केंद्रित सेवाओं को बेहतर बनाना, आधुनिक तकनीक अपनाना और अस्पतालों को डिजिटल प्रणाली की ओर ले जाना होगा।

वहीं डॉ. कविता रानी शर्मा का कहना है कि सफदरजंग अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में हर दिन हजारों मरीज आते हैं, ऐसे में बेहतर चिकित्सा सेवा, रिसर्च और मेडिकल शिक्षा को और मजबूत करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। इससे न केवल चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक सुधार की उम्मीद है, बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला डॉक्टरों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

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