आयोग के सामने रखी गईं 5 प्रमुख मांगें
1. पुरानी पेंशन योजना की बहाली
कर्मचारी संगठनों ने नई पेंशन व्यवस्था के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
2. हाउस रेंट अलाउंस में संशोधन
महंगाई और बढ़ते आवास खर्च को देखते हुए विभिन्न श्रेणी के शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी की मांग की गई है। साथ ही कर्मचारियों के लिए आवास और अन्य कल्याणकारी ऋण सुविधाओं को दोबारा शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है।
3. वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अलग-अलग विभागों और पे लेवल में मौजूद वेतन संबंधी असमानताओं को समाप्त किया जाए। इसके अलावा पूरे सेवा काल में अधिक वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
4. स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाने पर जोर
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। संगठनों का मानना है कि चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और बेहतर कवरेज कर्मचारियों के हित में होगा।
5. संविदा कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा और सेवा लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी आयोग के सामने रखी है।
लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर आयोग पर
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को मजबूती से आयोग के सामने रख रहे हैं, जबकि सरकार सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

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