टूटे चावल की मात्रा में बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था के तहत राशन में मिलने वाले चावल में टूटे हुए दानों (Broken Rice) की सीमा काफी कम कर दी गई है। कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। जबकि उबले चावल में यह सीमा 16% से घटाकर 5% कर दी गई है। यानी अब लाभार्थियों को पहले की तुलना में अधिक साबुत दानों वाला चावल मिलेगा, जबकि राशन की मात्रा में कोई कटौती नहीं होगी।
2027-28 तक पूरे देश में लागू होगी व्यवस्था
नई गुणवत्ता नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। धान खरीद करने वाले राज्यों में नए मानकों के अनुरूप खरीद शुरू की जाएगी और खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2027-28 तक इसे पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद सभी राज्यों में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का वितरण नियमित रूप से किया जाएगा।
कई राज्यों में पहले ही सफल रहा प्रयोग
नई व्यवस्था लागू करने से पहले इसे कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में परखा गया। परीक्षण के दौरान बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद, प्रसंस्करण और वितरण की प्रक्रिया सफल रही। इसी अनुभव के आधार पर अब इस मॉडल को पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
QR कोड से होगी पूरी निगरानी
राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। चावल के प्रत्येक बैग पर QR कोड लगाया जाएगा, जिससे उसकी पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखी जा सकेगी। इससे अनाज की आवाजाही, भंडारण और वितरण की निगरानी आसान होगी तथा गड़बड़ी और लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
सरकार को होगी बड़ी बचत
नई व्यवस्था से केवल गुणवत्ता ही नहीं सुधरेगी, बल्कि राशन वितरण प्रणाली की लागत भी कम होगी। मिलिंग के दौरान अलग किए गए टूटे हुए चावल का उपयोग अन्य औद्योगिक और उत्पादक कार्यों में किया जाएगा। वहीं, उसके परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी।

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