करीब 51 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार के कटिहार और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा। इससे राज्य में बेहतर रेल संपर्क के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
कटिहार और किशनगंज को मिलेगा सीधा लाभ
प्रस्तावित रेलवे लाइन की कुल लंबाई लगभग 170 किलोमीटर होगी। इसमें करीब 45.68 किलोमीटर हिस्सा बिहार में और शेष पश्चिम बंगाल में विकसित किया जाएगा। यह रेल मार्ग पश्चिम बंगाल के कुमेदपुर से शुरू होकर आमबाड़ी फालाकाटा तक जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है चिकन नेक कॉरिडोर
चिकन नेक कॉरिडोर, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है, देश के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ने वाला बेहद संकरा भूभाग है। इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर केवल 20 से 25 किलोमीटर तक है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के निकट होने के कारण यह इलाका सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
बिहार में निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के पूरा होने से किशनगंज, ठाकुरगंज, गलगलिया और आसपास के क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। बेहतर रेल नेटवर्क से माल ढुलाई आसान होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
2033 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना के लिए डिजाइन और भू-तकनीकी सर्वेक्षण का कार्य पहले ही शुरू किया जा चुका है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को वर्ष 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय आधारभूत ढांचे को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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