सात घंटे के कार्य पर मिलेगी 300 रुपये मजदूरी
नई व्यवस्था के तहत योजना में कार्यरत अकुशल मजदूरों को सात घंटे के कार्यदिवस के बदले 300 रुपये की मजदूरी मिलेगी। यह दर मिट्टी कटाई जैसे कार्यों के लिए निर्धारित की गई है, जिसमें लीड और लिफ्ट का कार्य भी शामिल रहेगा। इससे पहले इसी प्रकार के कार्य के लिए मजदूरों को 256 रुपये का भुगतान किया जाता था। नई दर लागू होने के बाद प्रत्येक कार्यदिवस पर मजदूरों की आय में 44 रुपये की बढ़ोतरी होगी।
ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए मजदूरी दर में संशोधन किया गया है। नई दर लागू होने से लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आय में सुधार होगा और उन्हें सरकारी रोजगार योजनाओं में काम करने के लिए बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा।
रोजगार योजनाओं के संचालन में आएगी पारदर्शिता
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, नई मजदूरी व्यवस्था का उद्देश्य केवल भुगतान बढ़ाना नहीं है, बल्कि रोजगार योजनाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है। इससे मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी समय पर मिल सकेगी और कार्यों के क्रियान्वयन में भी सुधार होने की उम्मीद है।
बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी बनेगी नोडल एजेंसी
मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के संचालन के लिए बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (BRDS) को नोडल एजेंसी बनाने की मंजूरी भी दी है। यह संस्था योजना के संचालन, निगरानी, समन्वय और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेगी।
नई व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण विकास कार्यों को मिलेगी नई गति
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, जल संरक्षण, मिट्टी कार्य और अन्य विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि बेहतर मजदूरी मिलने से श्रमिकों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे विकास योजनाओं का लाभ गांवों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
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