क्यों उठाया गया यह कदम?
शिक्षा विभाग का कहना है कि संबंधित शिक्षक ऐसे प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्त हुए हैं, जिसे विभाग पहले ही भर्ती के लिए मान्य नहीं मान चुका था। विभागीय जांच में सामने आया कि नियमों के बावजूद कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो गई। अब इस त्रुटि को सुधारने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन में पहले से था स्पष्ट
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान जारी विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि NIOS का 18 महीने का डीएलएड प्रमाणपत्र निर्धारित श्रेणी की नियुक्तियों के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने वर्ष 2023 में भी इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बावजूद कुछ अभ्यर्थियों का चयन हो गया, जिसे अब विभाग नियमों के अनुरूप ठीक करने की तैयारी में है।
TRE-3 भर्ती के बाद बढ़ा विवाद
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से आयोजित तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के लिए हुई इस भर्ती के बाद दस्तावेजों की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें अभ्यर्थियों ने 18 महीने के डीएलएड प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। इसी के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित नियुक्तियों की समीक्षा शुरू की।
करीब तीन हजार शिक्षकों पर असर की आशंका
हालांकि अभी तक आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार लगभग तीन हजार शिक्षक इस कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। यदि जांच में उनकी नियुक्ति नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। इससे संबंधित शिक्षकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
आगे की भर्ती और तबादलों पर भी पड़ेगा असर
शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमों के अनुरूप कार्रवाई पूरी होने के बाद आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और तबादलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी होगी, वहां भविष्य की नियुक्तियों के माध्यम से रिक्त पद भरे जाने की योजना है।
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