13 स्टेशनों पर बदलेगा सिग्नलिंग सिस्टम
इस परियोजना के तहत दुर्ग-तारोकी रेलखंड के मारौडा, रिसमा, गुंडार्देही, लाटाबोर, बालोद, कुसुमकासा, दल्ली राजहरा, गुडम, भानुप्रतापुर, केवटी, अंतागढ़, तारोकी और रायपुर स्टोर डिपो में मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली को हटाकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि ट्रेनों का संचालन बिना किसी बाधा के किया जा सके।
क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम?
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रेलवे की उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है, जो ट्रेनों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करने और सिग्नलों का स्वचालित नियंत्रण करने का काम करती है। यह प्रणाली विभिन्न ट्रैक और सिग्नलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करती है, जिससे किसी भी प्रकार की टकराव या संचालन संबंधी त्रुटि की संभावना काफी कम हो जाती है। इस तकनीक में अधिकांश प्रक्रियाएं स्वचालित होती हैं, जिससे मानवीय गलती की आशंका भी घटती है और पूरे नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ती है।
यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित और सुगम सफर
नई प्रणाली लागू होने के बाद ट्रेनों के समय पर संचालन में सुधार होने की संभावना है। यदि किसी कारणवश सिग्नलिंग सिस्टम में तकनीकी समस्या आती है, तो इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की मदद से उसका पता तेजी से लगाया जा सकेगा और मरम्मत भी पहले की तुलना में कम समय में संभव होगी। इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ट्रेनों के अनावश्यक विलंब और परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने की उम्मीद है।

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