2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
नई गाइडलाइन के अनुसार पूरे राज्य में पंचायत क्षेत्रों का पुनर्गठन बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। परिसीमन की पूरी प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर पूरी होगी। प्रत्येक जिले में इस कार्य की जिम्मेदारी जिलाधिकारी (डीएम) को सौंपी गई है, जबकि प्रमंडलीय आयुक्त पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि काम समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके।
प्राकृतिक सीमाओं को मिलेगी प्राथमिकता
नई व्यवस्था में पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक और स्थायी पहचान वाले चिन्हों को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां संभव होगा, वहां नदी, सड़क, रेलवे लाइन, पहाड़ी और अन्य सार्वजनिक सीमाओं को आधार बनाकर नए निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित किए जाएंगे। इससे भविष्य में सीमा विवाद की संभावना कम होगी और प्रशासनिक कार्य भी आसान होंगे।
बिना आवश्यकता गांवों का नहीं होगा विभाजन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी राजस्व गांव को दो हिस्सों में विभाजित नहीं किया जाएगा। केवल ऐसी स्थिति में, जब किसी गांव की आबादी बहुत अधिक हो और दूसरा कोई व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध न हो, तब ही उसे एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में शामिल किया जा सकेगा।
पंचायत मुख्यालय तय करने के नए मानदंड
सरकार ने पंचायत मुख्यालय के चयन की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। सामान्य स्थिति में मुख्यालय उस गांव में बनाया जाएगा जहां सबसे अधिक आबादी होगी। हालांकि यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की संयुक्त आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, तो पंचायत मुख्यालय उस गांव में स्थापित किया जाएगा जहां इन वर्गों की आबादी सबसे अधिक होगी। पंचायत का नाम भी उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा।
लोगों को मिलेगा आपत्ति दर्ज कराने का अवसर
नई सीमाओं का प्रारंभिक मसौदा तैयार होने के बाद उसकी अधिसूचना संबंधित प्रखंड और जिला मुख्यालयों के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद आम नागरिकों को 15 दिनों के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों की जांच के बाद जिलाधिकारी अंतिम अधिसूचना जारी करेंगे और नई सीमाएं प्रभावी हो जाएंगी।
तीनों स्तरों के लिए अलग-अलग नियम
नई गाइडलाइन में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं।
ग्राम पंचायत के सभी वार्ड उसी पंचायत की सीमा के भीतर रहेंगे।
पंचायत समिति का गठन करते समय किसी ग्राम पंचायत के वार्ड को अलग नहीं किया जाएगा।
जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्र भी पंचायत समिति की सीमा को बिना विभाजित किए तैयार किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय बनाए रखना और चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
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